Home Loan EMI कैलकुलेटर
अपने होम लोन की EMI, कुल ब्याज और amortization schedule का अनुमान लगाएं। अफोर्डेबल मासिक किश्त खोजने के लिए अलग-अलग tenure और ब्याज दरें compare करें।
डिफ़ॉल्ट नतीजा क्या बताता है
कैलकुलेटर ₹30,00,000 के लोन, 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि से शुरू होता है। इस पर EMI लगभग ₹26,035, कुल ब्याज लगभग ₹32.48 लाख और कुल भुगतान लगभग ₹62.48 लाख बनता है। यानी उधार ली गई रकम से ज़्यादा आप ब्याज में चुकाते हैं।
शुरुआती साल लगभग पूरे ब्याज में जाते हैं। पहले साल आप लगभग ₹3.12 लाख की EMI भरते हैं, जिसमें से लगभग ₹2.53 लाख ब्याज है और सिर्फ़ लगभग ₹59,700 से लोन घटता है। इस लोन पर सालाना ब्याज नौवें साल तक ₹2 लाख से ऊपर रहता है। टैक्स वाले हिस्से में यह बात काम आएगी।
पहले तय करें कि कितनी EMI भर सकते हैं
बैंक कितना लोन देगा, यह पूछने के बजाय पहले यह तय करें कि किराया या मेंटेनेंस, मौजूदा EMI, बीमा और बचत के बाद कितनी EMI आराम से भर पाएंगे। फिर कैलकुलेटर में उल्टा हिसाब लगाएं।
उदाहरण: अगर ₹40,000 महीना आपकी सीमा है, तो 8.5% और 20 साल पर अलग-अलग रकम डालकर देखें। ₹46,00,000 पर EMI लगभग ₹39,920 आती है, यानी लगभग ₹46 लाख का लोन आपके बजट में है। इससे ऊपर की रकम डाउन पेमेंट के रूप में अपनी जेब से देनी होगी, साथ में स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और फ़र्निशिंग का ख़र्च भी, जो EMI में शामिल नहीं है।
यही रकम एक प्रतिशत ज़्यादा दर पर भी चलाकर देखें। फ़्लोटिंग रेट लोन के लिए यह एक व्यावहारिक जांच है, और बढ़ी हुई EMI भी इमरजेंसी फ़ंड छुए बिना भर पाना ज़रूरी है।
अवधि और कुल ब्याज का पूरा हिसाब
| अवधि (₹30 लाख, 8.5%) | EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 15 साल | ₹29,542 | ₹23.18 लाख |
| 20 साल | ₹26,035 | ₹32.48 लाख |
| 25 साल | ₹24,157 | ₹42.47 लाख |
| 30 साल | ₹23,067 | ₹53.04 लाख |
अवधि 20 से 30 साल करने पर EMI हर महीने लगभग ₹2,967 घटती है, लेकिन ब्याज लगभग ₹20.56 लाख बढ़ जाता है। हर अतिरिक्त पांच साल से EMI कम घटती है और ब्याज ज़्यादा बढ़ता है। कैलकुलेटर 1 से 30 साल तक की अवधि लेता है, इसलिए उन्हीं दो-तीन विकल्पों की तुलना करें जिनके बीच आप सच में चुनाव कर रहे हैं।
टैक्स छूट: पुरानी बनाम नई व्यवस्था (टैक्स ईयर 2026-27)
पुरानी व्यवस्था, अपने रहने का घर: सालाना ₹2 लाख तक का ब्याज घटाया जा सकता है (पहले धारा 24(b), रिपोर्ट के अनुसार अब आयकर अधिनियम 2025 की धारा 22)। EMI का मूलधन वाला हिस्सा धारा 123 (पुरानी 80C) की ₹1.5 लाख की सीमा में गिना जाता है, जो PPF जैसे दूसरे निवेशों के साथ साझा होती है।
डिफ़ॉल्ट लोन पर पहले साल का ब्याज लगभग ₹2.53 लाख है, इसलिए लगभग ₹52,700 पर कोई छूट नहीं मिलती। लगभग ₹59,700 का मूलधन धारा 123 में तभी आएगा जब उसकी सीमा बची हो। अगर आपकी आय पुरानी व्यवस्था के 30% स्लैब में है, तो ₹2 लाख की पूरी ब्याज छूट से 4% सेस मिलाकर हर साल लगभग ₹62,400 टैक्स बचता है।
नई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट): अपने रहने वाले घर के लोन पर न ब्याज की छूट है, न मूलधन की। किराये पर दिए घर में ब्याज उसी घर के किराये से घटाया जा सकता है, पर इससे बना घाटा न सैलरी से घटेगा और न आगे ले जाया जा सकता है। इसलिए होम लोन की टैक्स छूट तभी मायने रखती है जब कुल मिलाकर पुरानी व्यवस्था आपके लिए सस्ती पड़े।
जॉइंट होम लोन
को-बॉरोअर की आय जुड़ने से बड़ा लोन मिल सकता है, लेकिन कैलकुलेटर पूरे लोन की एक ही EMI दिखाता है। बजट बनाने के लिए इसे हर व्यक्ति के हिस्से से बांट लें: ₹46 लाख के लोन पर लगभग ₹39,920 की EMI को आधा-आधा बांटें तो हर व्यक्ति का हिस्सा लगभग ₹19,960 है। अगर एक व्यक्ति भुगतान बंद कर दे, तो बैंक आमतौर पर पूरी EMI दूसरे से भी वसूल सकता है, इसलिए दोनों को कुछ महीनों तक अपने हिस्से से ज़्यादा भरने की क्षमता रखनी चाहिए। अगर दोनों अलग-अलग टैक्स छूट लेना चाहते हैं, तो साइन करने से पहले सह-मालिकों की शर्तें किसी टैक्स सलाहकार से पक्की कर लें।
यह टूल कैसे इस्तेमाल करें
- 1ऊपर दिए फ़ील्ड में अपनी जानकारी भरें।
- 2टाइप करते ही नतीजे अपने आप अपडेट हो जाते हैं।
- 3अलग-अलग scenario compare करने के लिए values बदलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹50,000 की EMI पर कितना होम लोन मिलेगा?+
8.5% ब्याज पर ₹50,000 की EMI से 20 साल में लगभग ₹57.6 लाख और 25 साल में लगभग ₹62.1 लाख का लोन चुकाया जा सकता है। आख़िरी सीमा बैंक आपकी आय, दूसरी EMI और क्रेडिट हिस्ट्री देखकर तय करेगा, और डाउन पेमेंट व रजिस्ट्रेशन का ख़र्च आपको अपनी बचत से देना होगा।
किराये पर दिए फ़्लैट के होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है क्या?+
हां। नई व्यवस्था में ब्याज सिर्फ़ उसी फ़्लैट के किराये से घटता है, और घाटा न सैलरी से घटेगा न आगे ले जाया जा सकेगा। पुरानी व्यवस्था में पूरा ब्याज किराये से घटता है और रिपोर्ट के अनुसार सालाना ₹2 लाख तक का घाटा दूसरी आय से घटाया जा सकता है, बाक़ी 8 साल तक आगे ले जाया जा सकता है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन फ़्लैट की प्री-EMI क्या कैलकुलेटर में शामिल है?+
नहीं। निर्माण के दौरान बैंक लोन किस्तों में जारी करता है और आमतौर पर आप सिर्फ़ जारी हुई रकम पर ब्याज भरते हैं। कैलकुलेटर मानता है कि पूरा लोन पहले दिन मिल गया। इसे पूरा लोन जारी होने के बाद शुरू होने वाली EMI के लिए इस्तेमाल करें और सिर्फ़ ब्याज वाले दौर का बजट अलग से बनाएं।